Upanayana Sanskar - 10AM
उपनयन संस्कार उत्तर भारतीय हिन्दू परंपरा में एक पवित्र संस्कार है, जो व्यक्ति के आध्यात्मिक दीक्षा और जीवन की जिम्मेदारियों को स्वीकार करने का प्रतीक है। इसे जनेऊ संस्कार भी कहा जाता है, जो अनुशासन, शिक्षा और नैतिक मूल्यों की ओर अग्रसर होने का संकेत देता है। परंपरागत रूप से यह विवाह से पहले किया जाता है, जिससे व्यक्ति विद्यार्थी जीवन से गृहस्थ जीवन में प्रवेश के लिए तैयार माना जाता है। इस संस्कार के माध्यम से वर परिवार, समाज और आध्यात्मिक कर्तव्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करता है। उपनयन संस्कार धर्म, मर्यादा और जागरूकता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर प्रार्थनाओं द्वारा बुद्धि, सौहार्द और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद मांगा जाता है।

Sangeet - 4PM (Followed by Dinner)

संगीत समारोह विवाह से पूर्व होने वाला एक उल्लासपूर्ण आयोजन है, जहाँ परिवार और मित्र मिलकर गीत-संगीत व नृत्य के माध्यम से खुशियाँ साझा करते हैं। संस्कृत में ‘संगीत’ का अर्थ है साथ मिलकर गाना, और यह परंपरा विशेष रूप से पंजाब क्षेत्र से जुड़ी मानी जाती है। यह कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विवाह के उत्सव की आनंदमयी शुरुआत है। इस अवसर पर गीत, नृत्य और सामूहिक उत्सव के साथ वर-वधू के नए जीवन के लिए प्रेम और शुभकामनाएँ व्यक्त की जाती हैं।
पहले संगीत समारोह कई दिनों तक चलता था, लेकिन आजकल समय की सुविधा को देखते हुए इसे एक दिन का आयोजन किया जाता है। यह समारोह आमतौर पर विवाह से दो–तीन दिन पहले, प्रायः मेहंदी से पहले आयोजित होता है। इस अवसर पर परिवार की वरिष्ठ महिलाएँ वर
वधू के लिए पारंपरिक गीत गाती हैं, जबकि रिश्तेदार और मित्र नृत्य के माध्यम से अपनी खुशियाँ व्यक्त करते हैं। खुले डांस फ्लोर पर सभी मिलकर उत्सव मनाते हैं। संगीत का आयोजन प्रायः ढोल की थाप पर गाए जाने वाले पारंपरिक सुहाग गीतों से किया जाता है।
Venue: 137B/1A New Bairahana, Prayagraj
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