Matmangra - 2PM
मटमंगरा' (Matmangra) या 'मटकोरा' (Matkora) विवाह से पहले की एक रस्म है, जिसमें मिट्टी खोदने के लिए जौ, पान, पीला कपड़ा, सिंदूर, फावड़ा, और मंगल गीत गाने वाली महिलाएं शामिल होती हैं, और इसका उद्देश्य धरती से घर-गृहस्थी के लिए आशीर्वाद मांगना है, जिसमें मिट्टी खोदकर कलश स्थापित किया जाता है और फिर हल्दी लगाई जाती है।

Haldi - 4PM

हल्दी की रस्म वैदिक विवाह अनुष्ठान है जिसमें हल्दी (जिसे हरिद्रा भी कहा जाता है) का उपयोग शुद्धिकरण और सुरक्षा के लिए किया जाता है। यह विवाह से पहले दूल्हा-दुल्हन को शांत मन और शुद्ध शरीर के साथ गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करने में मदद करने के लिए की जाती है। पीला रंग सूर्य की गर्माहट और अग्नि की शुद्ध करने वाली शक्ति का प्रतीक है, जो जोड़े के चारों ओर एक उज्ज्वल और सकारात्मक वातावरण बनाता है। हल्दी को एक सुरक्षात्मक परत के रूप में भी देखा जाता है जो उन्हें नकारात्मक प्रभावों या बुरी नज़र से बचाती है, जिससे वे स्थिरता और स्पष्टता के साथ विवाह स्थल में प्रवेश कर पाते हैं।आयुर्वेद इस अनुष्ठान को उद्वर्तन से जोड़ता है, जो एक पारंपरिक शारीरिक उपचार है जो चमक बढ़ाता है, रक्त संचार में सहायता करता है और शरीर को हल्का और संतुलित महसूस कराता है। हल्दी प्राकृतिक रूप से जीवन शक्ति और स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है, और इसका हल्का उपयोग ऊर्जा मार्गों को सक्रिय करता है। हल्दी में अक्सर चंदन, गुलाब जल, दूध या तिल का तेल मिलाया जाता है, जिनमें से प्रत्येक पंच तत्वों से जुड़ा है और संतुलन बनाने के लिए मिलाया जाता है। परिवार की महिलाएं स्नेह और आशीर्वाद के साथ हल्दी लगाती हैं, जिससे यह समारोह देखभाल, जुड़ाव और शांत तैयारी का क्षण बन जाता है। यह व्यक्तिगत जीवन से पारिवारिक स्नेह और प्राचीन समझ से पोषित एक साझा यात्रा की ओर संक्रमण का प्रतीक है।
Venue: 137B/1A New Bairahana, Prayagraj
चेतावनी ⚠️: इस समारोह में कपड़े पीले हो सकते हैं और चेहरे चमक सकते हैं।”